Namaste England Movie Review: कुछ भी नया नहीं है, अक्षय कुमार को मिस करेंगे आप

  • Latest News,Images,Videos & Music going Viral now - Viralcast.io

'नमस्ते इंग्लैंड'…ये फिल्म कागजों पर शायद इतनी बुरा ना लगी हो. लेकिन पर्दे पर जो हुआ है उसके बारे में क्या ही कहें. दो जाने पहचाने एक्टर, बेहतरीन फ्रैंचाइजी, आंखें, वक्त, नमस्ते लंडन जैसी फिल्म बना चुके डायरेक्टर और एक कहानी जिसमें फिलहाल चल रहे महिला सशक्तिकरण के मुद्दे की गूंज सुनाई दे सकती थी. सब मिलकर एक अच्छी फिल्म नहीं तैयार कर पाए. जो रिजल्ट निकलकर सामने आया है वो काफी बोगस रहा. ऐसा लग रहा है मानो स्क्रीन पर दो एक्टर बेवजह बस कुछ किए जा रहे हैं.

साल 2007 में 'नमस्ते लंदन' में अपने सादे किरदार से दर्शकों को इंप्रेस करने वाले अक्षय कुमार को आप इस फिल्म में मिस करेंगे. यहां परम यानी की अर्जुन कपूर आपको जबरदस्ती यकीन दिलाने की कोशिश करेंगे कि वह सबसे साधारण इंसान हैं. भले ही उन्होंने गैरकानूनी तरीके से यूरोप में एंट्री ली हो, भले ही उन्होंने अपनी पत्नी की दोस्त से फर्जी फ्रेंडशिप करने की प्लानिंग की हो. चलिए यहां हम उन्हें बेनिफिट ऑफ डाउट देते हैं. लेकिन इसके बाद जो होता है वो समझ के परे है.

परम की पत्नी जसमीत (परिणीति चोपड़ा) उनकी फ्रेंड को बुरे से बुरे तरीके से बेइज्जत करती है. जैसे कि 'इसके बैठने बोलो तो ये लेट जाती है'. ये 1980 के दशक में शायद एक बार हजम हो जाए लेकिन #MeToo के इस दौर में ये काफी बेतुका सा लगता है. लेखक भले ही ये सोच सकता है कि किरदार उस समय के हैं. लेकिन ये फिल्म मेकर पर भी निर्भर करता है कि अपने किरदारों को किस तरह पेश करता है.

नमस्ते इंग्लैंड में एक लड़की है जो लंदन के रहने वाले एक लड़के से शादी करने वाली होती है उसे ऐन मौके पर समझ आता है कि उसे अपने देश के सम्मान के बारे में सोचना चाहिए. ये आइडिया उसके दिमाग में अर्जुन कपूर के मोनोलोग के बाद आता है. लेकिन ये देखकर लगता है कि अगर आपको कोई सीन रिपीट करना भी था तो थोड़ा बेहतर लिख लिया जाता. इस अजीब मोनोलोग के बाद एक लेडी अर्जुन को 'देसी हंक' कहकर इंट्रोड्यूस करती है. अब बताइए ऐसे में कोई इस सीन को सीरियसली कैसे ले सकता है. ये सब यहीं खत्म नहीं होता. इसके बाद आता है वो सीन जब अर्जुन कपूर खुद को शाहरुख खान से कंपेयर करते हैं.कहानी के बीच-बीच में कुछ लेक्चर्स हैं जैसे कि लालच के लिए अपने देश को नहीं छोड़ना चाहिए. हम आगे आने वाले समय में शक्तिशाली देश बनने वाले हैं. कुल मिालकर 141 मिनट की ये फिल्म कहीं नहीं जाती. ये उस टूटे सितारे की तरह है जिसकी बात आप सबने बचपन में की होगी. लेकिन आप ना कभी उसे देख पाए ना समझ पाए. आपको ये भी नहीं पता कि वो है भी या नहीं.

यह भी पढ़ें:

Badhaai Ho Movie Review: पूरी फिल्म में हंसते रहेंगे, कभी सोचेंगे तो कभी तालियां पीटेंगे